Site icon

आंचल राजभर की संदिग्ध मौत स्थानीय जांच पर उठे सवाल, अब क्राइम ब्रांच करेगी जांच

पोस्टमार्टम में करंट लगने से मौत की बात, परिजनों ने जताया हत्या का संदेह; FSL से क्राइम सीन रीक्रिएशन और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की दोबारा समीक्षा की तैयारी


गाजीपुर: करीमुद्दीनपुर थाना क्षेत्र के पहराजपुर (उतरांव) गांव में 12 वर्षीय आंचल राजभर की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। मौत की वजह को लेकर सामने आए अलग-अलग दावों ने जांच की दिशा और स्थानीय पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शासन स्तर पर मामले की जांच स्थानीय पुलिस से हटाकर क्राइम ब्रांच को सौंपने का निर्णय लिया गया है। अब मामले की जांच पुलिस अधीक्षक की निगरानी में किए जाने की बात सामने आई है।
खेत में मिला था किशोरी का शव
बताया गया है कि 5 अगस्त को आंचल राजभर खेत/सिवान की ओर घास काटने गई थी। इसी दौरान उसका शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। घटना के बाद परिजनों ने इसे सामान्य हादसा मानने से इनकार करते हुए हत्या की आशंका जताई।
परिजनों का आरोप है कि अमरूद तोड़ने और घास काटने को लेकर हुए मामूली विवाद के बाद कुछ लोगों ने आंचल के साथ मारपीट की और उसकी हत्या कर दी। उनका यह भी आरोप है कि घटना को हादसे का रूप देने के लिए शव को जर्जर विद्युत तार के पास डाल दिया गया। परिजनों की ओर से पांच लोगों के खिलाफ नामजद शिकायत दिए जाने की बात कही गई है।
हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने से पहले नहीं की जा सकती है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बढ़ाया विवाद
7 अगस्त को चिकित्सकों के पैनल द्वारा किए गए पोस्टमार्टम में मौत का कारण करंट लगना बताया गया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, पोस्टमार्टम में मारपीट के स्पष्ट निशान नहीं मिलने की बात भी सामने आई।
यही बिंदु अब पूरे मामले का सबसे अहम पहलू बन गया है। एक ओर परिजन हत्या का आरोप लगा रहे हैं, जबकि पोस्टमार्टम निष्कर्ष में बिजली का करंट मौत की वजह बताया गया है। इन दोनों दावों के बीच मौजूद अंतर ने ग्रामीणों और परिजनों की शंकाओं को और बढ़ा दिया।
विरोध के बाद बढ़ा प्रशासनिक दबाव
पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद क्षेत्र में आक्रोश बढ़ने और विरोध-प्रदर्शन की स्थिति बनने की जानकारी है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, चक्का जाम और पथराव जैसी स्थिति भी बनी।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की। मंत्री के हस्तक्षेप के बाद जांच को नए सिरे से आगे बढ़ाने की बात कही गई है।
अब वैज्ञानिक साक्ष्यों पर टिकी जांच
मामले की नई जांच में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका फॉरेंसिक साक्ष्यों की होगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, FSL की टीम घटनास्थल का क्राइम सीन रीक्रिएशन करेगी। इसके साथ ही मेडिको-लीगल विशेषज्ञों से पोस्टमार्टम रिपोर्ट की दोबारा समीक्षा कराए जाने की बात सामने आई है।
इस प्रक्रिया से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि घटनास्थल की परिस्थितियां पोस्टमार्टम में सामने आए ‘करंट लगने’ के निष्कर्ष से कितनी मेल खाती हैं। साथ ही, घटनास्थल पर मौजूद विद्युत तार, बिजली की व्यवस्था, शव की स्थिति और अन्य भौतिक साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच भी महत्वपूर्ण होगी।
सबसे बड़ा सवाल: हादसा या हत्या?
आंचल राजभर मामले में फिलहाल दो प्रमुख सवाल सामने हैं—क्या किशोरी की मौत वास्तव में विद्युत करंट लगने से हुई, या फिर किसी आपराधिक घटना के बाद इसे हादसे का रूप देने की कोशिश की गई?
इसका जवाब केवल आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि फॉरेंसिक जांच, घटनास्थल के वैज्ञानिक परीक्षण, पोस्टमार्टम रिपोर्ट की विशेषज्ञ समीक्षा और उपलब्ध प्रत्यक्ष/तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आ सकता है।
पुलिस की भूमिका भी जांच के दायरे में
मामले में स्थानीय पुलिस की शुरुआती कार्रवाई को लेकर परिजनों और ग्रामीणों में असंतोष सामने आने की बात कही गई है। यदि जांच वास्तव में स्थानीय पुलिस से हटाकर क्राइम ब्रांच को दी गई है, तो यह कदम प्रशासन की ओर से मामले की निष्पक्षता को लेकर उठे सवालों को गंभीरता से लेने का संकेत माना जा सकता है।
हालांकि, जांच एजेंसी बदलना अपने आप में किसी अधिकारी या पुलिसकर्मी की लापरवाही अथवा किसी पक्ष की संलिप्तता साबित नहीं करता। इसकी पुष्टि जांच के निष्कर्षों के बाद ही हो सकेगी।
राजनीतिक और सामाजिक असर
मामले का असर केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है। आंचल राजभर की मौत को लेकर राजभर समाज में आक्रोश की स्थिति बनने से यह मामला सामाजिक और राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील हो गया है। ऐसे मामलों में प्रशासन के सामने एक साथ दो चुनौतियां होती हैं—निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना और अफवाहों अथवा अपुष्ट दावों के आधार पर तनाव बढ़ने से रोकना।
इसलिए आने वाले दिनों में क्राइम ब्रांच की जांच और FSL रिपोर्ट इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
निष्कर्ष
आंचल राजभर की मौत के मामले में अभी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में करंट लगने की बात सामने आई है, जबकि परिवार हत्या का आरोप लगा रहा है। अब वैज्ञानिक जांच यह स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होगी कि घटनास्थल की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और आंचल की मौत किन परिस्थितियों में हुई।
प्रशासन द्वारा तय समयसीमा में निष्पक्ष जांच और उसके निष्कर्षों को सार्वजनिक करना ही इस मामले में उठ रहे सवालों का सबसे विश्वसनीय जवाब होगा।

MIRROR INDIA NEWS NETWORK
ताज़ा और विश्वसनीय खबरों के लिए MIRROR INDIA पोर्टल और YouTube चैनल को सब्सक्राइब करें।
अपने क्षेत्र की खबर भेजें: mirrorindnews@gmail.com

Exit mobile version