उत्तर प्रदेश: रक्षक बना भक्षक, दरोगा पर नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप; कोर्ट ने बैठाई जांच

बदायूँ : उत्तर प्रदेश में खाकी वर्दी पर एक बार फिर दाग लगा है। बदायूँ से अपहृत एक 15 वर्षीय नाबालिग बच्ची से स्वयं एक पुलिस उपनिरीक्षक (दरोगा) पर दुष्कर्म का आरोप लगा है। इस सनसनीखेज मामले ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और लोगों में भारी आक्रोश है।
जानकारी के अनुसार, 10 जून को बदायूँ से एक नाबालिग बच्ची के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज की गई थी। परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी 20 जून तक पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इसके बाद, जब लोगों ने इस मामले पर भारी हंगामा और प्रदर्शन किया, तब जाकर पुलिस सक्रिय हुई।
पुलिस की सक्रियता के बाद, दरोगा हरिराम तमिलनाडु से बच्ची को बरामद कर लाया। लेकिन, आरोप है कि बच्ची को बरामद करने के बाद दरोगा ने उसे सीधे परिजनों को सौंपने या विधिक प्रक्रिया का पालन करने के बजाय, कई दिनों तक अपने निजी कमरे में बंद रखा।
कोर्ट में बच्ची का चौंकाने वाला बयान:
पुलिस ने जब लड़की को कोर्ट में पेश किया, तो यह दावा किया कि बच्ची से तमिलनाडु में बलात्कार हुआ था। हालांकि, कोर्ट में बच्ची ने जो बयान दिया, वह चौंकाने वाला था। बच्ची ने अपने बयान में स्पष्ट कहा कि उसके साथ बदायूँ लाकर दरोगा हरिराम ने ही दुष्कर्म किया है। बच्ची के इस बयान ने पूरे मामले को एक नया और गंभीर मोड़ दे दिया है।
इस गंभीर आरोप के बाद, आरोपी दरोगा हरिराम का शाहजहाँपुर ट्रांसफर कर दिया गया है। इस घटना को लेकर जनता में भारी रोष और गुस्सा व्याप्त है। लोग पूछ रहे हैं कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और थाने में ही बेटियों की आबरू नीलाम होने लगे, तो जनता न्याय के लिए कहाँ जाए? मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने इस पूरे प्रकरण की जांच बैठा दी है।
यह घटना उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा और पुलिस की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जिसकी निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग उठ रही है।
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