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मऊ की MP-MLA कोर्ट सख्त कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी

रतनपुरा जनसभा में भाजपा नेताओं को ‘जूता मारने’ की धमकी का मामला; 16 मई को व्यक्तिगत पेशी के आदेश

मऊ: उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर की मुश्किलें कानूनी मोर्चे पर बढ़ती नजर आ रही हैं। मऊ की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने गुरुवार (30 अप्रैल) को कड़ा रुख अपनाते हुए राजभर के खिलाफ

गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया है। यह कार्रवाई बार-बार समन जारी किए जाने के बावजूद अदालत में पेश न होने के कारण की गई है।

क्या है मामला?


मामला वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान का है। 17 मई 2019 को मऊ जिले के हलधरपुर थाना अंतर्गत रतनपुरा बाजार में एक चुनावी जनसभा आयोजित की गई थी। आरोप है कि इस सभा में ओमप्रकाश राजभर ने तत्कालीन सहयोगी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया था। उन्होंने मंच से उत्तेजक बयान देते हुए भाजपा नेताओं को “जूता मारने” की धमकी दी थी, जिसके बाद उनके खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।

अदालत की सख्ती


मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. कृष्ण प्रताप सिंह की अदालत में इस मामले की सुनवाई चल रही है। अदालत ने राजभर को अपना पक्ष रखने के लिए कई बार समन और नोटिस जारी किए थे, लेकिन उनके उपस्थित न होने पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की। अदालत ने अब पुलिस को निर्देशित किया है कि कैबिनेट मंत्री को गिरफ्तार कर **16 मई 2026** तक हर हाल में कोर्ट के समक्ष पेश किया जाए।

पहले भी जारी हुआ था वारंट


उल्लेखनीय है कि यह पहली बार नहीं है जब राजभर को इस तरह की स्थिति का सामना करना पड़ा है। पिछले वर्ष भी एक अन्य मामले में उनके खिलाफ कोर्ट ने वारंट जारी किया था, जिसे बाद में उनके वकीलों की दलीलों के आधार पर रिकॉल (निरस्त) कर दिया गया था। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस बार भी राजभर के पास उच्च न्यायालय जाने या वारंट को रिकॉल कराने का विकल्प खुला है।
फिलहाल, सरकार के एक मंत्री के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने से प्रदेश के राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब सबकी निगाहें 16 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।


ओमप्रकाश राजभर की बढ़ी मुश्किलें, मऊ कोर्ट से गैर-जमानती वारंट जारी।

न्यायालय का कड़ा रुख: ‘जूता मारने’ की धमकी मामले में घिरे मंत्री राजभर, 16 मई को पेशी।

कानूनी शिकंजा: बार-बार समन की अनदेखी पड़ी भारी, राजभर के खिलाफ NBW जारी।

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