केरल अब होगा ‘केरलम’: सेवा तीर्थ की कैबिनेट बैठक में नाम बदलने की प्रक्रिया को मिली हरी झंडी

नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम: देश की राजनीति और सांस्कृतिक पहचान के लिहाज से एक बड़ा फैसला सामने आया है। सेवा तीर्थ में आयोजित पहली कैबिनेट बैठक में केंद्र सरकार ने दक्षिणी राज्य ‘केरल’ का आधिकारिक नाम बदलकर ‘केरलम’ (Keralam) करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का अहम निर्णय लिया है। यह कदम राज्य विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव और लंबे समय से चल रही भाषाई मांग के बाद उठाया गया है।
मलयालम पहचान और ऐतिहासिक संदर्भ
राज्य सरकार का यह तर्क रहा है कि मलयालम भाषा में राज्य का वास्तविक नाम ‘केरलम’ है, जबकि भारतीय संविधान की पहली अनुसूची में इसे ‘केरल’ दर्ज किया गया है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने 2024 में पहली बार नाम बदलने का प्रस्ताव पेश करते हुए कहा था कि राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी मलयालम भाषी क्षेत्रों को एकजुट कर ‘संयुक्त केरलम’ बनाने की मांग उठी थी। इस फैसले को अब केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक अस्मिता के सम्मान के तौर पर देखा जा रहा है।
विधानसभा से सर्वसम्मति से पास हुआ था प्रस्ताव
केरल विधानसभा ने 25 जून 2024 को दूसरी बार इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया था। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रस्ताव की समीक्षा के बाद कुछ तकनीकी संशोधन सुझाए थे, जिन्हें शामिल कर 140 सदस्यीय विधानसभा ने इसे दोबारा पास कर केंद्र को भेजा था।
संवैधानिक प्रक्रिया और आगे की राह
किसी भी राज्य का नाम बदलने के लिए महज प्रशासनिक आदेश काफी नहीं होता। इसके लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत संसद में संशोधन पारित करना अनिवार्य है।
* संविधान की पहली अनुसूची: इसमें संशोधन कर ‘केरल’ शब्द को हटाकर ‘केरलम’ किया जाएगा।
* आठवीं अनुसूची: राज्य सरकार ने यह भी मांग रखी है कि संविधान की आठवीं अनुसूची में दर्ज सभी मान्यता प्राप्त भाषाओं में राज्य का नाम ‘केरलम’ ही लिखा जाए।
यदि संसद से यह संशोधन पारित होकर राष्ट्रपति की मंजूरी प्राप्त कर लेता है, तो सभी सरकारी रिकॉर्ड, आधिकारिक दस्तावेजों, नक्शों और पत्राचार में ‘केरलम’ नाम ही इस्तेमाल होगा।
आगामी चुनावों के मद्देनजर सियासी मायने
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य में आगामी मई से पहले विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने अभी तारीखों का ऐलान नहीं किया है, लेकिन नाम परिवर्तन का यह मुद्दा चुनावी माहौल में अहम भूमिका निभा सकता है। एक ओर जहां सत्तारूढ़ दल इसे अपनी बड़ी सांस्कृतिक जीत के रूप में पेश करेगा, वहीं विपक्ष की इस पर क्या रणनीति होगी, यह देखना दिलचस्प होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, संसद की मंजूरी और अधिसूचना जारी होने में अभी कुछ वक्त लग सकता है, लेकिन केंद्र के इस सकारात्मक रुख ने यह साफ कर दिया है कि जल्द ही देश के नक्शे पर ‘केरल’ आधिकारिक तौर पर ‘केरलम’ के रूप में जाना जाएगा।
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