लखनऊ: राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में अपनी मांगों को लेकर पिछले 8 दिनों से डटे उत्तर प्रदेश के कोटेदारों (राशन डीलरों) का आक्रोश अब बढ़ता जा रहा है। प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए हजारों कोटेदारों ने सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई, तो वे विधानसभा का घेराव करने को मजबूर होंगे।
क्या है प्रमुख मांगें?
कोटेदारों ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाते हुए खाद्यान्न और चीनी के वितरण पर मिलने वाले लाभांश (कमीशन) में बढ़ोतरी की मांग की है। इसके साथ ही, वे एक निश्चित ‘नियमित मानदेय’ (Fixed Salary) की भी मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान प्रधानमंत्री अन्न योजना और खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत अपनी जान की परवाह किए बिना घर-घर राशन पहुंचाया, लेकिन सरकार उनके योगदान को नजरअंदाज कर रही है।
दूसरे राज्यों से तुलना: यूपी में सबसे कम लाभांश
धरने पर बैठे कोटेदारों ने आंकड़ों के साथ अपनी पीड़ा व्यक्त की। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश में उन्हें मात्र 90 रुपये प्रति कुंतल का लाभांश मिलता है, जो महंगाई के इस दौर में बेहद कम है।
वहीं, दूसरे राज्यों की स्थिति इससे काफी बेहतर है:
* हरियाणा और गोवा: यहाँ कोटेदारों को 200 रुपये प्रति कुंतल लाभांश दिया जा रहा है।
* गुजरात: यहाँ सरकार ने कोटेदारों के लिए 20,000 रुपये की न्यूनतम आय की गारंटी (Minimum Income Guarantee) तय की है।
यूपी के कोटेदारों का सवाल है कि जब काम एक जैसा है, तो दाम और सुविधाओं में इतना भेदभाव क्यों?
सरकार को खुली चेतावनी
कोटेदार संघ के पदाधिकारियों ने दो-टूक कहा है कि वे सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन अगर उनकी अनदेखी जारी रही, तो वे विरोध करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मानदेय और लाभांश वृद्धि की मांग पूरी नहीं होती, धरना जारी रहेगा और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा।
फिलहाल, 8 दिन बीत जाने के बाद भी सरकार की तरफ से कोई ठोस आश्वासन न मिलने से कोटेदारों में भारी नाराजगी है।
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