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कोर्ट के आदेश पर मकान गिराने पहुंची टीम, किसान परिवार टंकी पर चढ़ा, दो घंटे हंगामा

लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में सोमवार को उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब प्रशासन की टीम अदालत के आदेश पर एक मकान गिराने गांव पहुंची। कार्रवाई के विरोध में किसान बृजेश सिंह अपने परिवार सहित गांव की पानी की टंकी पर चढ़ गए। करीब दो घंटे तक चले हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद प्रशासन ने उन्हें समझाकर नीचे उतारा और हिरासत में ले लिया।

जानकारी के अनुसार, ईसानगर थाना क्षेत्र के हसनपुर कटौली गांव में सोमवार सुबह एसडीएम शशिकांत मणि और सीओ शमशेर बहादुर सिंह पुलिस बल के साथ अदालत के आदेश का पालन कराने पहुंचे थे। जैसे ही मकान गिराने की प्रक्रिया शुरू होने लगी, बृजेश सिंह अपने परिवार के साथ पानी की टंकी पर चढ़ गए। इससे मौके पर अफरातफरी मच गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए।

किसान यूनियन का विरोध, धरने पर बैठे कार्यकर्ता

घटना की सूचना मिलते ही भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) के जिलाध्यक्ष दिलबाग सिंह अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंच गए और कार्रवाई के विरोध में धरने पर बैठ गए। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि पहले पीड़ित परिवार के पुनर्वास की व्यवस्था की जाए, उसके बाद ही मकान गिराया जाए।

■ दो घंटे बाद उतरे टंकी से, पुलिस ने लिया हिरासत में

प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने करीब दो घंटे तक समझाने का प्रयास किया। काफी मान-मनौव्वल के बाद बृजेश सिंह और उनके परिवार को सुरक्षित टंकी से नीचे उतारा गया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया और मकान खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

जमीन विवाद बना कार्रवाई की वजह

ग्रामीणों के अनुसार, संबंधित जमीन पहले जगदंबा पुत्र राजनारायण के नाम थी, जो वर्ष 2011 में वसीयत के आधार पर राजा अभिनाश सिंह और इरा सिंह के नाम दर्ज हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने यह जमीन राजा अभिनाश सिंह से खरीदी थी, लेकिन रजिस्ट्री नहीं हो सकी।

बाद में उक्त जमीन शिवशंकर सेठ को बेची गई, जिसके बाद 2015 में विवाद शुरू हुआ और मामला अदालत में चला गया। लंबी सुनवाई के बाद 22 जनवरी 2026 को न्यायालय ने बृजेश सिंह के मकान को गिराने का आदेश दिया।

■ गरीब परिवार के सामने छत का संकट

ग्रामीणों का कहना है कि बृजेश सिंह का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। परिवार में पत्नी, चार बेटियां और एक बेटा शामिल हैं। ऐसे में मकान गिरने पर उनके सामने रहने का संकट खड़ा हो जाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की पुनः जांच कराने की मांग की है।

प्रशासन का पक्ष

एसडीएम शशिकांत मणि ने बताया कि न्यायालय के आदेश के अनुपालन में कार्रवाई की जा रही है। विरोध के चलते देरी हुई, लेकिन प्रशासन कानून के तहत कार्य करेगा। साथ ही उन्होंने प्रभावित परिवार को आवास और पट्टा देने का आश्वासन भी दिया है।

वहीं, जमीन के खरीदार पक्ष का कहना है कि उन्होंने वैध तरीके से जमीन खरीदी है और अदालत से बेदखली का आदेश प्राप्त किया है। उन्हें न्यायालय और प्रशासन पर पूरा भरोसा है।

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