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श्रम कानूनों में बदलाव के विरोध में ‘समता-संवाद’ आयोजित, श्रमिक अधिकारों की रक्षा पर दिया गया ज़ोर



वाराणसी: देश में नए श्रम कानूनों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच रविवार को वाराणसी के सिंहपुर, गोलाबाजार, सारनाथ में ‘समता-संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में श्रमिक संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और वंचित तबकों से जुड़े प्रतिनिधियों ने श्रम कानूनों में किए गए बदलावों पर गंभीर आपत्ति जताते हुए इन्हें मजदूर विरोधी करार दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि मजदूर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन नई श्रम संहिताओं के लागू होने से रोजगार की सुरक्षा कमजोर हुई है। उनका आरोप था कि इन बदलावों से नियोक्ताओं को कर्मचारियों को आसानी से रखने और निकालने की छूट मिल गई है, जिससे असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का शोषण बढ़ने की आशंका है। वक्ताओं ने यह भी कहा कि लंबे कार्यघंटों और सामाजिक सुरक्षा के अभाव का सीधा असर मजदूरों के स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन पर पड़ेगा।
समता-संवाद में गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स की स्थिति पर भी चिंता जताई गई। वक्ताओं ने कहा कि इन श्रमिकों को पारंपरिक कर्मचारी का दर्जा न मिलने से न्यूनतम मजदूरी, तय कार्यघंटे और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। इसे श्रमिक हितों के विरुद्ध बताया गया।
वक्ताओं ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर आरोप लगाया कि श्रम सुधारों के नाम पर पूंजीपतियों के हितों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि मेहनतकश वर्ग के अधिकार कमजोर किए जा रहे हैं। साथ ही रोजगार सृजन और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की मांग भी उठाई गई।
कार्यक्रम माता सावित्रीबाई फुले, फातिमा शेख और संविधानविद जयपाल सिंह मुंडा की जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया। आयोजकों ने कहा कि श्रमिक अधिकारों की रक्षा के लिए जनचेतना अभियान आगे भी जारी रहेगा और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराया जाएगा।

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