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फतेहपुर: यातायात व्यवस्था बेपटरी, अवैध स्टैंड और ‘वसूली’ के खेल से जनता बेहाल

प्रमुख चौराहों पर डग्गामार वाहनों का कब्जा, जाम में फंस रही एंबुलेंस; पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल


फतेहपुर : जिला मुख्यालय की यातायात व्यवस्था इन दिनों पूरी तरह से राम भरोसे है। कोतवाली क्षेत्र के प्रमुख चौराहों और बस अड्डों पर संचालित हो रहे अवैध स्टैंडों ने शहर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। अदौली पुलिया से लेकर लखनऊ बाईपास तक, हर तरफ अव्यवस्था का बोलबाला है, जिससे स्थानीय नागरिकों और राहगीरों का जीना मुहाल हो गया है।
इन इलाकों में बना ‘जाम का जंजाल’
स्थानीय लोगों के अनुसार अदौली पुलिया, देवीगंज, ज्वालागंज, लखनऊ बाईपास और बिंदकी बस स्टॉप जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर अवैध रूप से बस और ऑटो स्टैंड संचालित हो रहे हैं। सड़क के बीचों-बीच सवारियां भरने की होड़ में निजी बसें और डग्गामार वाहन घंटों जाम का कारण बनते हैं। सुबह और शाम के समय स्थिति इतनी विकराल हो जाती है कि पैदल चलना भी दूभर है। कई बार गंभीर मरीजों को ले जा रही एंबुलेंस भी इस कुप्रबंधन की भेंट चढ़कर जाम में फंसी नजर आती हैं।
चेकिंग के नाम पर ‘टारगेट’ की शिकायत
क्षेत्रीय नागरिकों और वाहन चालकों ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के बजाय पुलिस का पूरा ध्यान ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले बाइक सवारों पर रहता है। कागजों की जांच के नाम पर उन्हें रोककर कथित रूप से अवैध वसूली की जाती है। आरोप है कि बड़े वाहनों और अवैध स्टैंड संचालकों से ‘मासिक सेटिंग’ के चलते उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती, जबकि गरीब बाइक सवारों को निशाना बनाया जाता है।
ओवरलोड वाहनों से ‘एंट्री’ का खेल!
सूत्रों की मानें तो लोधीगंज क्षेत्र में मिट्टी और मौरंग से लदे ओवरलोड वाहनों से भी ‘गिनती’ के नाम पर अवैध धन उगाही की चर्चाएं आम हैं। चर्चा है कि इन वाहनों को रोककर उनकी संख्या के आधार पर पैसे लिए जाते हैं, जिससे क्षेत्र में आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि दुकानों के सामने खड़े बेतरतीब वाहनों के कारण उनका व्यापार भी प्रभावित हो रहा है।
निष्पक्ष जांच की उठी मांग
शहर की जागरूक जनता ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि इन अवैध बस स्टैंडों को तत्काल बंद कराया जाए। साथ ही, वसूली के आरोपों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाए ताकि व्यवस्था में सुधार हो सके। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो जनता का आक्रोश सड़कों पर उतर सकता है।

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