बनारस को बसाने वाले ‘भर राजा बनार वीर’ की स्मृति में ‘सुहेलदेव राजभर एकता मंच’ ने भरी हुंकार

ऐतिहासिक गौरव और सामाजिक चेतना पर आधारित संगोष्ठी का वाराणसी में भव्य आयोजन


वाराणसी: 15 मार्च 2026: सारनाथ स्थित रोज गार्डन लॉन (सुहेलदेव राजभर पार्क) में आज ‘सुहेलदेव राजभर एकता मंच’ के तत्वावधान में “बनारस को बसाने वाले भर राजा बनार वीर जी” की स्मृति में एक विशाल सभा एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राजभर समाज के गौरवशाली इतिहास को उजागर करना और वर्तमान सामाजिक-राजनैतिक चुनौतियों पर मंथन करना था।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और बनारस का निर्माण:
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए इतिहासकारों और वक्ताओं ने तथ्यों के साथ यह बात रखी कि राजभर (भर) एक Native-Indigenous समुदाय है, जिसका अर्थ ही ‘भूमि-पुत्र’ है। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि बनारस (काशी) को बसाने का श्रेय ‘राजा बनार वीर’ को जाता है। इतिहास गवाह है कि प्रथम शताब्दी से लेकर 14वीं शताब्दी तक इस समाज का शासन पूर्वांचल, अवध, बुंदेलखंड और बिहार के बड़े भूभाग पर रहा। तुगलक और शर्की सल्तनत के दौरान इस समाज को सत्ता से बेदखल किया गया और बाद में ब्रिटिश शासन काल में ‘जन्मजात अपराधी’ घोषित कर सामाजिक और आर्थिक रूप से हाशिए पर धकेल दिया गया।
मुख्य अतिथि का संबोधन:
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. सगीना राजभर (भूतपूर्व निदेशक, भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण, भारत सरकार) ने कहा, “जिस समाज का अपना साझा इतिहास और एकता नहीं होती, वह बिखर जाता है। पिछले दशकों में समाज के साथ हुए अन्याय, जमीनों पर कब्जे और शैक्षणिक पिछड़ेपन को दूर करने का एकमात्र रास्ता ‘संगठित समाज’ है। हमें अपनी ऐतिहासिक विरासत को पहचान कर आधुनिक लोकतंत्र में अपनी सत्ता-व्यवस्था पर काबिज होना होगा।”
विशिष्ट अतिथियों के विचार:
विशिष्ट अतिथि मा. शिव भारद्वाज (सहायक आयुक्त, उद्योग) और डॉ. शैलेश रजवार ने युवाओं की भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में शिक्षा ही वह हथियार है जिससे समाज अपनी पहचान वापस पा सकता है। डॉ. राहुल राजभर, डॉ. आनंद राजभर और मा. रामचंद्र राव ने भी समाज की वर्तमान स्थिति और भविष्य , वानर वीर जी पर विस्तृत रुप ऐतिहासिक विचार रखे।
प्रमुख संकल्प और मांगें:
संगोष्ठी के दौरान आयोजक मंडल ने समाज में व्याप्त बेरोजगारी, अशिक्षा और नशेखोरी जैसी कुरीतियों के खिलाफ अभियान छेड़ने का संकल्प लिया। मंच ने यह भी मांग की कि ‘भर राजा बनार वीर जी’ के इतिहास को पाठ्यक्रमों में स्थान दिया जाए और समाज के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जाए।
उपस्थिति:
कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ. शैलेश रजवार, PCS अधिकारी मा. अभिषेक राजभर सहित हजारों की पूर्वांचल के लगभग सभी जनपदों से समाज के लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन और प्रबंधन अरविन्द भारद्वाज, अनिल राजभर, दीपक राजभर और कमलेश राजभर द्वारा किया गया।
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