वाराणसी-जौनपुर में जारी हो रहे प्रमाण पत्र, तो सुल्तानपुर में क्यों है रोक? संगठित प्रयास और आरटीआई से ही निकलेगा हल: डॉ. राजभर
सुल्तानपुर: जनपद में विमुक्त जाति प्रमाण पत्र (Vimukt Jati Certificate) बनने की प्रक्रिया थमने को लेकर समाज में असमंजस की स्थिति है। इस मुद्दे पर मुंबई स्थित स्क्रीन राइटर्स एसोसिएशन (SWA) के लेखक और कलाकार डॉ. चन्द्रपाल राजभर ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी कर समाज को आईना दिखाया है। उनका कहना है कि यह प्रशासनिक रोक से ज्यादा ‘सामाजिक शून्यता’ का परिणाम है।
पड़ोसी जिलों में बन रहे, तो यहाँ क्यों नहीं?
डॉ. चन्द्रपाल ने सवाल उठाया कि यदि वाराणसी, जौनपुर, आज़मगढ़ और फैज़ाबाद जैसे पड़ोसी जनपदों में विमुक्त जाति के प्रमाण पत्र आज भी जारी हो रहे हैं, तो इसका सीधा अर्थ है कि शासन स्तर पर इसे बंद नहीं किया गया है। सुल्तानपुर में इसका न बनना यह दर्शाता है कि यहाँ संगठित मांग और पैरवी की कमी है।
अधिकार मांगने पड़ते हैं, मिलते नहीं
डॉ. राजभर ने कहा, “इतिहास गवाह है, जहाँ समाज सजग रहा, वहाँ व्यवस्थाएं सुधरी हैं। अधिकार कभी खत्म नहीं होते, वे फाइलों में तब तक दबे रहते हैं जब तक उन्हें मांगा नहीं जाता।” उन्होंने जोर देकर कहा कि निष्क्रियता ही सबसे बड़ी बाधा है। केवल घर बैठकर चिंता करने से प्रमाण पत्र नहीं बनेंगे, इसके लिए वैधानिक संघर्ष करना होगा।
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