आजमगढ़: जिले की सियासत में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। जिला पंचायत अध्यक्ष **** की कुर्सी पर खतरा मंडराने लगा है। कथित टेंडर घोटाले और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोपों के बाद राज्यपाल स्तर से 30 दिनों का अल्टीमेटम जारी किया गया है। इस अवधि में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में कड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है।
प्रकरण की जड़ वित्तीय वर्ष 2023–24 से जुड़ी बताई जा रही है। आरोप है कि जिला पंचायत में कई ऐसे विकास कार्यों के नाम पर टेंडर जारी किए गए, जिनका कार्य पहले ही काग़ज़ों में पूरा दर्शाया जा चुका था। इसके बावजूद उन्हीं कार्यों के लिए पुनः टेंडर जारी कर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगा है। शिकायत शासन तक पहुंचने के बाद जांच कराई गई, जिसमें कई गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि हुई।
जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रशासन ने प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए कुछ संबंधित अधिकारियों को निलंबित कर दिया। लेकिन जैसे ही जांच की परिधि जिला पंचायत अध्यक्ष तक पहुंची, मामला सीधे राज्यपाल तक जा पहुंचा। शासन का स्पष्ट संदेश है कि यदि तय समयसीमा में जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो जिला पंचायत अधिनियम के तहत अध्यक्ष को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके साथ ही आगे चुनाव लड़ने पर रोक लगाने जैसे प्रावधानों पर भी विचार किया जा सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने इसलिए भी राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है, क्योंकि विजय यादव, आजमगढ़ सदर से विधायक और पूर्व मंत्री **** के पुत्र हैं। ऐसे में कार्रवाई की आशंका ने जिले की राजनीति में हलचल और अटकलों को और तेज कर दिया है।
विपक्ष इस मामले को भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की दिशा में कदम बता रहा है, जबकि समर्थकों का कहना है कि यह राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। फिलहाल, सबकी नजरें 30 दिनों की समयसीमा पर टिकी हैं। यही अवधि तय करेगी कि विजय यादव की कुर्सी बची रहती है या **** की राजनीति में एक नया मोड़ आता है।
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