श्रम कानूनों में बदलाव को लेकर मजदूर संगठनों में आक्रोश, ‘समता-संवाद’ का आयोजन 4 जनवरी को

वाराणसी:देश में नए श्रम कानूनों को लेकर मजदूर और मेहनतकश तबकों में असंतोष गहराता जा रहा है। मजदूर संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई नई श्रम संहिताएं श्रमिकों के अधिकारों, सुरक्षा और सम्मान पर सीधा प्रहार हैं।
उनका कहना है कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले मजदूरों को इन कानूनों के माध्यम से और अधिक असुरक्षित स्थिति में धकेल दिया गया है।
आंकड़ों के अनुसार, देश के लगभग 60 करोड़ कार्यबल में से करीब 90 प्रतिशत मजदूर असंगठित क्षेत्र में कार्यरत हैं। इनमें निर्माण मजदूर, खेत मजदूर, घरेलू सहायक, रिक्शा-ऑटो चालक, ईंट-भट्ठा मजदूर, फेरीवाले और रेहड़ी-पटरी पर काम करने वाले लोग शामिल हैं। यह तबका देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 65 प्रतिशत का योगदान देता है, बावजूद इसके इन्हें नियमित रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और पेंशन जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

मजदूर संगठनों का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी सरकार ने पुराने श्रम कानूनों को ‘सरलीकरण’ और ‘सुधार’ के नाम पर समाप्त कर चार नई श्रम संहिताएं लागू की हैं, जिससे नियोक्ताओं को कर्मचारियों को आसानी से रखने और निकालने की छूट मिल गई है। इससे रोजगार की सुरक्षा कमजोर हुई है और कम वेतन पर अधिक समय तक काम कराने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिला है। संगठनों का यह भी कहना है कि लंबे कार्यघंटों का असर मजदूरों के स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन पर पड़ेगा, वहीं महिलाओं के शोषण की आशंका भी बढ़ेगी।
इसके अलावा, करोड़ों गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को पारंपरिक कर्मचारी का दर्जा नहीं दिए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि इन श्रमिकों के लिए न तो न्यूनतम मजदूरी तय है और न ही कार्यघंटों की कोई सीमा, जिससे उनका शोषण और बढ़ सकता है।
इन्हीं मुद्दों को लेकर वाराणसी के सिंहपुर, गोलाबाजार, सारनाथ में 4 जनवरी 2026 को ‘श्रम-कानूनों में बदलाव और श्रमिक अधिकारों की चेतना’ विषय पर ‘समता-संवाद’ का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम माता सावित्रीबाई फुले, फातिमा शेख और संविधानविद जयपाल सिंह मुंडा की जयंती के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। आयोजन दोपहर 12 बजे शुरू होगा।
कार्यक्रम के आयोजकों ने अधिक से अधिक मजदूरों, युवाओं और सामाजिक संगठनों से इसमें भाग लेने की अपील की है।
आयोजक:
डॉ. राहुल राजभर, अरविन्द भारद्वाज, संतोष प्रजापति
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