लखनऊ: उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) द्वारा कृषि निदेशालय के अंतर्गत विज्ञापित प्राविधिक सहायक (ग्रुप-सी) के 2759 पदों पर भर्ती प्रक्रिया विवादों में घिरती नजर आ रही है। अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर विज्ञापन में आरक्षण के निर्धारण और वितरण में गंभीर विसंगतियों का आरोप लगाया है।
प्रमुख विसंगतियां जिन पर अभ्यर्थियों ने जताई आपत्ति:
संवैधानिक प्रतिशत का उल्लंघन: अभ्यर्थियों का दावा है कि सारणी-1 में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित पदों की संख्या राज्य सरकार के निर्धारित आरक्षण मानकों के अनुरूप नहीं है। विशेष रूप से ST वर्ग के लिए मात्र 6 पद (0.2%) दिखाए गए हैं, जबकि नियमतः यह 2% होना चाहिए। इसी तरह अन्य वर्गों की गणना पर भी सवाल उठाए गए हैं।
क्षैतिज आरक्षण (Horizontal Reservation) का उलझाव: विज्ञापन की सारणी-2 में कुल 551 क्षैतिज आरक्षण के पद दर्शाए गए हैं, लेकिन स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के आश्रित, महिला और दिव्यांग श्रेणियों के बीच इनका स्पष्ट गणितीय विभाजन समझ से परे है।
दिव्यांग श्रेणियों का अस्पष्ट वर्गीकरण: दिव्यांगता की विभिन्न उप-श्रेणियों (जैसे L.V., H.H., O.L.) के लिए पदों का स्पष्ट आवंटन न होने से पात्र अभ्यर्थियों में भ्रम और असंतोष की स्थिति बनी हुई है।
अभ्यर्थियों की माँग
प्रतियोगी छात्रों ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपील करते हुए मांग की है कि भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए विज्ञापन की आरक्षण तालिकाओं की पुन: जांच कराई जाए। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक विभाग इस संबंध में ‘शुद्धि-पत्र’ (Corrigendum) जारी कर स्थिति स्पष्ट नहीं करता, तब तक विसंगतियों के कारण योग्य उम्मीदवारों का हक मारा जा सकता है।
“भर्ती पारदर्शी होनी चाहिए। आरक्षण नियमों की अनदेखी से हजारों छात्रों का भविष्य अधर में है। हम चाहते हैं कि नियमानुसार पदों का पुनर्गठन कर संशोधित विज्ञापन जारी हो।”
— एक पीड़ित अभ्यर्थी
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