उत्तर प्रदेश

आठवें वेतन आयोग की बैठक में उपेक्षा से राज्य कर्मचारियों में आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी

लखनऊ: आठवें केंद्रीय वेतन आयोग की बैठक में उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ और उससे संबद्ध संगठनों को आमंत्रित न किए जाने पर कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है। महासंघ ने इसे सूबे के 16 लाख राज्य कर्मचारियों और शिक्षकों का अपमान बताते हुए चेतावनी दी है कि यदि आयोग ने उनका पक्ष नहीं सुना, तो वे दिल्ली कूच कर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।
वित्त विभाग पर भेदभाव का आरोप
उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष कमल अग्रवाल एवं प्रांतीय महामंत्री अशोक सिंह ने एक संयुक्त बयान में बताया कि 22 व 23 जून 2026 को आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के साथ कर्मचारियों के हितों पर विचार-विमर्श हेतु बैठक आयोजित की गई है। इस बैठक में वित्त विभाग (उत्तर प्रदेश शासन) द्वारा भेदभावपूर्ण रवैया अपनाते हुए केवल अखिल भारतीय सेवा के संगठनों को ही आमंत्रित किया गया है, जबकि राज्य के शीर्ष मान्यता प्राप्त परिसंघ ‘उ0प्र0 राज्य कर्मचारी महासंघ’ की पूरी तरह उपेक्षा की गई है।
“आयोग ने पहले 18 बिंदुओं की प्रश्नोत्तरी जारी कर ऑनलाइन सुझाव मांगे थे और राज्यों में जाकर स्थानीय संगठनों से चर्चा का आश्वासन दिया था। लेकिन अब स्थानीय संगठनों को वार्ता से दूर रखकर कर्मचारियों की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।”
कमल अग्रवाल, प्रांतीय अध्यक्ष

सातवें वेतन आयोग की विसंगतियां अब तक अधूरी
महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने आज तक सातवें वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर नहीं किया है, जिससे कर्मचारी पहले से ही खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। ऐसे में आठवें वेतन आयोग से उन्हें बड़ी उम्मीदें थीं कि महासंघ के सुझावों के आधार पर पिछली कमियों को दूर किया जाएगा। शासन के इस उपेक्षात्मक रवैये से 16 लाख नियमित कर्मचारियों के साथ-साथ लाखों संविदा, आउटसोर्सिंग और निकाय कार्मिकों में गहरा असंतोष है।
महासंघ की प्रमुख मांगें
कर्मचारी महासंघ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से शासन के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:
ग्रुप डी की नियमित नियुक्तियां: विभाग में चतुर्थ श्रेणी (ग्रुप डी) के पदों पर तत्काल नियमित भर्तियां शुरू की जाएं।
पेंशनर्स को मिले लाभ: समस्त सेवानिवृत्त पेंशनर्स को आठवें वेतन आयोग के दायरे में लाया जाए, उन्हें किसी भी सूरत में इस लाभ से वंचित न किया जाए।
NPS कर्मियों को राहत: एनपीएस (NPS) के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों को रीइंबर्समेंट (प्रतिपूर्ति) की सुविधा प्रदान की जाए।
बैठक में ये रहे मौजूद
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एस.पी. सिंह, सेवानिवृत्त पेंशनर्स एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बी.एल. कुशवाहा, संरक्षक नरेंद्र प्रताप सिंह, राम भजन मौर्य, उत्तर प्रदेश फेडरेशन ऑफ मिनिस्ट्रियल सर्विस एसोसिएशंस के प्रांतीय अध्यक्ष जे.पी. पांडेय सहित परमेश्वर सिंह, अफीफ सिद्दीकी, लाखन सिंह चौहान और राम जी शुक्ला सहित कई प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे। महासंघ ने पुरजोर मांग की है कि शासन स्तर पर तत्काल वार्ता कर महासंघ के प्रतिनिधिमंडल को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।

लखनऊ से सैयद मोहम्मद की रिपोर्ट।

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