उत्तर प्रदेश

सुलतानपुर: 5 करोड़ से बदलेगी सीताकुंड घाट की सूरत, विधायक विनोद सिंह ने किया भूमि पूजन

पुरातत्व विभाग से भी स्वीकृत हुए 2.5 करोड़, हटाया जाएगा अतिक्रमण

सुलतानपुर: शहर के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले सीताकुंड घाट को ‘गोमती कॉरिडोर’ के रूप में विकसित करने की दिशा में शुक्रवार को एक बड़ा कदम उठाया गया। स्थानीय शहर विधायक विनोद सिंह ने सीताकुंड घाट पर वैदिक मंत्रोच्चार और पूरे विधि-विधान के साथ भूमि पूजन कर इस महत्वाकांक्षी परियोजना का विधिवत शुभारंभ किया। इस दौरान विधायक ने खुद फावड़ा चलाकर निर्माण कार्य की शुरुआत कराई।
भूमि पूजन के इस विशेष कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष सुशील त्रिपाठी, गोमती मित्र मंडल के पदाधिकारी कुंवर दिनकर प्रताप सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता रुद्र प्रताप सिंह और चंदन नारायण सिंह सहित शहर के कई गणमान्य लोग और भारी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा घाट
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि व शहर विधायक विनोद सिंह ने कहा कि सीताकुंड घाट हमारी आस्था और इतिहास का केंद्र है। लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से इस पूरे क्षेत्र का कायाकल्प किया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत यहाँ अत्याधुनिक घाट का निर्माण, सर्वसुविधायुक्त शौचालय, स्नानागार, श्रद्धालुओं के बैठने की उत्तम व्यवस्था और भव्य एवं आकर्षक लाइटिंग (प्रकाश व्यवस्था) की जाएगी, जिससे शाम के समय पूरा घाट रोशनी से जगमगा उठेगा।
भगवान कुश की नगरी को मिलेगी नई पहचान
विधायक ने आगे बताया कि सुल्तानपुर (भगवान कुश की नगरी) की ऐतिहासिक और पौराणिक पहचान को अक्षुण्ण रखने के लिए पुरातत्व विभाग से भी ढाई करोड़ रुपये की विशेष धनराशि स्वीकृत कराई गई है। इस बजट से क्षेत्र के प्राचीन धार्मिक स्थलों का संरक्षण और सौंदर्यीकरण का कार्य किया जाएगा। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि कॉरिडोर के रास्ते में आने वाले सभी अवैध अतिक्रमणों को हटाया जाएगा, ताकि इस धार्मिक स्थल का मूल और भव्य स्वरूप वापस बहाल किया जा सके।
इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने के लिए जिला पंचायत के प्रशासनिक अधिकारी दिनेश सिंह, राजेश पांडेय, आकाश जायसवाल समेत बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, भाजपा समर्थक और स्थानीय जनता उपस्थित रही।

कुल बजट: ₹5 करोड़ (गोमती कॉरिडोर) + ₹2.5 करोड़ (पुरातत्व विभाग)
प्रमुख कार्य: आधुनिक घाट, स्नानागार, शौचालय, आकर्षक लाइटें और बैठने के बेंच।
विशेष कदम: प्राचीन धार्मिक स्थलों का संरक्षण और अतिक्रमण मुक्त होगा सीताकुंड क्षेत्र।

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